रायगढ़ ।
शुगर की गंभीर बीमारी के चलते 27 वर्षीय कु. बबीता यादव को अपना बायां पैर गंवाना पड़ा। इस हादसे ने न सिर्फ उनकी शारीरिक स्वतंत्रता छीनी, बल्कि उनके सपनों और जीवन की दिशा को भी प्रभावित किया। दिव्यांगता के कारण न चल पाने और काम में असमर्थ होने की स्थिति में, बबीता का आत्मविश्वास टूटने लगा था। ऐसे कठिन समय में भी बबीता ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए प्रयास किया। उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन रायगढ़ में एक मोटराइज्ड ट्रायसायकल की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया। जिला प्रशासन ने जब कु.बबीता की पीड़ा, संघर्ष और आर्थिक हालात को देखा, तो संवेदनशीलता के साथ तत्काल कार्रवाई की गई एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा उन्हें आवागमन सुविधा के रूप में एक मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई। यह ट्रायसायकल न सिर्फ उनके लिए एक साधन बना, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की दिशा में पहला कदम भी सिद्ध हुआ।
उल्लेखनीय है कि जनपद पंचायत रायगढ़ के अंतर्गत ग्राम मुरालीपाली, ग्राम पंचायत परसदा की रहने वाली कु बबीता यादव, पिता वीरसिंह यादव, एक कठिन दौर से गुजर रही थीं। माता-पिता दोनों रोजी-मजदूरी का काम करते है। घर में बबीता से छोटी दो बहन और एक भाई भी है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी, जिससे इलाज से लेकर दैनिक जरूरतों तक की परेशानियों का सामना बबीता के परिवार पर पड़ रहा था।मोटराइज्ड ट्रायसायकल से हुई जिंदगी की नई शुरूआत मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्राप्त होते ही कु.बबीता यादव और उनका परिवार अत्यंत प्रसन्न हुए। बबीता ने इसे अपनी नई जिंदगी की शुरुआत बताया, जिससे अब वे घर से बाहर निकलकर अपने छोटे-मोटे कार्य स्वयं कर सकेंगी और सामाजिक जीवन में फिर से जुड़ सकेंगी। कु.बबीता ने बताया कि वह सिलाई-कढ़ाई के साथ कम्प्यूटर सीखने की ईच्छा है। उन्होंने बताया कि कम्प्यूटर सीखकर कुछ नया करने एवं जीवन में आगे बढऩे की चाह रखती है।
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