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एनएमसीडी आरएंडडी सेंटर और आरडीसीआईएस के बीच समझौता

एनएमसीडी आरएंडडी सेंटर और आरडीसीआईएस के बीच समझौता

जगदलपुर।

 एनएमसीडी आरएंडडी सेंटर और आरडीसीआईएस सेल ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। जिसका उद्देश्य स्टील उद्योग के विकास और तकनीकी उन्नति को गति देना है। इस समझौते के तहत, दोनों संगठन कई महत्वपूर्ण पहलों पर मिलकर काम करेंगे। इसके अतिरिक्त, दोनों संगठन तकनीकी जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। जिससे ज्ञान-साझा करने और उद्योग में नवीनतम प्रगति को अपनाने में तेजी आएगी।

यह समझौता एनएमडीसी के निदेशक (तकनीकी) विनय कुमार, अधिशासी निदेशक (आरपी एवं पर्यावरण और रेड) एम जयपाल रेड्डी और आरडीसीआईएस, सेल के सीजीएम पी. पाठक ने किया है। इस साझेदारी से खनिज प्रसंस्करण और कोयला उपयोग में नवाचार लाने के साथ-साथ उन्नत बेनेफिशिएशन तकनीकों के विकास पर केंद्रित है। साथ ही जिससे निम्न और दुर्बल-ग्रेड के लौह अयस्क को अपग्रेड कर कोयले की प्रसंस्करण क्षमता में सुधार किया जा सकेगा।
इसमें लौह अयस्क और चूना पत्थर का सूखा बेनेफिशिएशन, कोयले की प्रवाह क्षमता में सुधार कर च्यूट जामिंग को कम करना, और कोयले के कार्बनाइजेशन व परीक्षण पर शोध करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, दोनों संगठन तकनीकी जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे ताकि ज्ञान-साझा करने और उद्योग में नवीनतम प्रगति को अपनाने में तेजी आ सके।

लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा: निदेशक 
इस मौके पर एनएमसीडी के निदेशक (तकनीकी) विनय कुमार ने कहा कि हम देश की आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भरता में योगदान देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। भारत में 2030 तक 300 मिलियन टन क्रूड स्टील उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य प्राप्त करने के लिए, निम्न और दुर्बल-ग्रेड के लौह अयस्क का सही उपयोग बेहद आवश्यक है। यह समझौता इस लक्ष्य को साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Uditbharatnews News

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