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रायपुर 60 लाख की डकैती : पीड़ित की बहन निकली मास्टरमाइंड, ऐसे रची गई थी डकैती की साजिश

रायपुर 60 लाख की डकैती : पीड़ित की बहन निकली मास्टरमाइंड, ऐसे रची गई थी डकैती की साजिश

रायपुर

राजधानी रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र में नगरीय निकाय चुनाव मतदान के बीच हुई दिनदहाड़े डकैती की घटना का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है. इस मामले में पुलिस ने नागपुर के दो अंतर्राज्यीय बदमाशों और एक महिला समेत कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूट के 59.50 लाख रुपये नगद, सोने के आभूषण और घटना में इस्तेमाल की गई दो कार जब्त की है. आरोपियों ने बिना नंबर की रिज्ड कार में सवार होकर डकैती की घटना को अंजाम दिया था. इस पूरे मामले का खुलासा रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा ने किया है.

ऐसे रची गई थी डकैती की साजिश, महिला निकली मास्टरमाइंड

प्रार्थी की बहन नेहा त्रिपाठी डीएसपी की बेटी राजनांदगाव निवासी है, जो पूरे डकैती के वारदात की मास्टरमाइंड है. उसने अपने मित्र BSF के रिटायर्ड सूबेदार मेजर ए. सोम शेखर के साथ मिलकर डकैती की प्लानिंग की थी. पुलिस जांच में पता चला कि ए. सोम शेखर, जो बीएसएफ से 2011 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर जमीन दलाली और एनजीओ से जुड़ा था, प्रार्थी के परिवार से परिचित भी था. उसे घर में रखे पैसे की जानकारी पीड़ित की बहन ने दे रखी थी. उसने अपने साथी देवलाल वर्मा और कमलेश वर्मा के साथ मिलकर डकैती की योजना बनाई. इस योजना में देवलाल और कमलेश ने अन्य अपराधियों को शामिल किया, जिनमें अजय ठाकुर, राहुल त्रिपाठी, नेहा त्रिपाठी, शाहिद पठान, पिंटू सारवान और मनुराज मौर्य शामिल थे. इस पूरी वारदात को महिला डकैत लीड कर रही थी. आरोपियों ने लगातार रेकी की और फिर 11 फरवरी को योजना के अनुसार वारदात को अंजाम दिया.

आरोपियों ने कैसे दिया डकैती की वारदात को अंजाम

प्रार्थी मनोहरण वेलू, जो अनुपम नगर में अपनी बहनों के साथ किराए के मकान में रहता है, उन्होंने खम्हारडीह थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 11 फरवरी को दोपहर करीब 2:30 बजे के बीच प्रार्थी अपनी दोनों बहनों के साथ घर पर था. इसी दौरान दो व्यक्ति फौजी वर्दी में घर के अंदर आए जिनके चेहरे रुमाल से ढके हुए थे. उन्होंने प्रार्थी से कहा कि कोई शिकायत की है या नहीं, इसी पर बातचीत करने आए हैं. बातचीत के दौरान, एक अन्य व्यक्ति, जिसने डार्क नीले रंग की पैंट पहन रखी थी और चेहरा रुमाल से ढका हुआ था, घर में प्रवेश कर गया. तभी एक वर्दीधारी व्यक्ति प्रार्थी के साथ धक्का-मुक्की कर उसे जमीन पर गिरा दिया. इसके बाद, वर्दीधारी व्यक्ति घर के अंदर से एक सफेद तौलिया लाया और उसके पैर बांध दिए, जबकि बिना वर्दी वाले व्यक्ति ने अपने साथ लाए सफेद रंग के टेप से उसके हाथ बांधकर मुंह पर भी टेप चिपका दिया. इसके बाद वर्दीधारी व्यक्ति ने अपने पास रखी पिस्टल निकालकर धमकी दी कि यदि उसने आवाज निकाली तो उसे जान से मार दिया जाएगा. इसी दौरान एक अन्य नकाबपोश पुरुष और पीले रंग का सलवार पहनी एक महिला, जिनका चेहरा रुमाल से ढका हुआ था, घर के अंदर आए और प्रार्थी की बहनों के कमरे में चले गए. कुछ देर बाद, सभी पांचों आरोपी घर से बाहर निकल गए और दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद कर दी. जब गाड़ी स्टार्ट होने की आवाज आई, तो प्रार्थी को उनके चले जाने का एहसास हुआ. इसके बाद उसने किसी तरह अपने हाथों में बंधे टेप को निकाला, फिर मुंह और पैरों से भी टेप और तौलिया हटाया. वहीं बगल के कमरे में जाकर उसने अपनी रंजनी के मुंह और हाथों में लगे टेप को भी खोला. रंजनी ने बताया कि एक व्यक्ति ने उसे पिस्टल दिखाकर धमकाया, मुंह और हाथों में टेप लगाया और उसकी बाईं भुजा में एक बार इंजेक्शन लगाया. इसके बाद उसने बिस्तर के अंदर रखे गुलाबी रंग के बैग में रखे 60 लाख रुपये और काले रंग के बैग में रखे 5 लाख रुपये लूट लिए.

वहीं दूसरी बहन प्रेमा ने बताया कि एक व्यक्ति ने उसका मुंह दबाकर पिस्टल दिखाते हुए जान से मारने की धमकी दी और उसकी दाहिनी भुजा में दो बार इंजेक्शन लगाया. इसके अलावा एक महिला ने उसके गले में पहनी सोने की चेन छीन ली और अलमारी से दो सोने की चेन और 25,000 रुपये नकद निकाल लिए. साथ ही प्रेमा और रंजनी के तीन मोबाइल फोन भी लूट लिए गए.

इस तरह चार नकाबपोश पुरुषों और एक नकाबपोश महिला ने घर में घुसकर प्रार्थी और उसकी बहनों को पिस्टल की धमकी देकर कुल 65,25,000 रुपये नकद, तीन सोने की चेन (करीब 6 तोला) और तीन मोबाइल फोन लूट लिए, जिनकी कुल कीमत लगभग 66,00,000 रुपये आंकी गई. प्रार्थी की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 310(2), 331(5), 123, 351(3) बीएनएस, 25 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया.

ऐसे पुलिस ने सुलझाया मामला

डकैती की घटना के तुरंत बाद रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा और एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने विशेष टीमों का गठन किया. इस टीम में ACCU की कुल 10 अलग-अलग टीमों ने घटना स्थल का निरीक्षण कर आसपास के 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आरोपियों की पहचान की. पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों के भागने की दिशा का पता लगाया. इस दौरान नाम न छापने कि शर्त पर रायपुर शहर के दो नागरिकों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए संदेहियों के प्रति पुलिस टीम को बड़ी लीड दी थी. साथ ही तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच टीम ने राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर, नागपुर, बलौदाबाजार और रायपुर में छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया.

जानकारी के मुताबिक ACCU एडिशनल एसपी संदीप मित्तल के नेतृत्व में टीम ने दुर्ग और राजनांदगांव टीम ने देर रात तक कैंप किया. इस दौरान बेहद ही बारीकी से शातिर आरोपियों की पतासाजी की गई. संदीप मित्तल के साथ पूरी टीम ने आरोपियों को चारो ओर घेरकर आरोपियों को धरदबोचा.

गिरफ्तार आरोपियों के नाम

अजय ठाकुर (38) – दुर्ग निवासी

राहुल त्रिपाठी (43) – गोरखपुर (उ.प्र.) निवासी

नेहा त्रिपाठी (41) – गोरखपुर (उ.प्र.) निवासी

देवलाल वर्मा (45) – रायपुर निवासी

पुरूषोत्तम देवांगन (33) – बलौदाबाजार निवासी

ए. सोम शेखर (56) – रायपुर निवासी

शाहिद पठान (36) – नागपुर, महाराष्ट्र निवासी

पिंटू सारवान (23) – बेमेतरा निवासी

मनुराज मौर्य (31) – बिलासपुर निवासी

कमलेश वर्मा (31) – रायपुर निवासी

Uditbharatnews News

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