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श्रीमद् भागवत कथा: आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग – पं. पवन चतुर्वेदी

श्रीमद् भागवत कथा: आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग – पं. पवन चतुर्वेदी

जांजगीर, खोखरा। 

दामोदर राठौर निवास में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धालु भक्ति के रंग में डूबे नजर आए। कथा वाचक पं. पवन कुमार चतुर्वेदी ने प्रवचन देते हुए कहा कि भागवत कथा सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य साधन है।

उन्होंने भागवत कथा की आध्यात्मिक महत्ता को समझाते हुए कहा, "भागवत कथा कोई मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक यज्ञ है, जिसे पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से ग्रहण करना चाहिए। यह जीवन की सारी व्यथाओं को हर लेती है और आत्मा को शुद्ध बनाकर मोक्ष का द्वार खोलती है।"

पं. पवन चतुर्वेदी ने धुंधकारी की कथा का उदाहरण देते हुए बताया कि "ब्राह्मण होते हुए भी वह घोर नास्तिक था, भोगविलासी था, जिसका परिणाम यह हुआ कि मृत्यु के बाद वह प्रेत बना। तब उसे अहसास हुआ कि श्रीमद् भागवत कथा ही वह ज्ञान गंगा है, जो आत्मा को पवित्र करती है और उसे परमात्मा से मिलाने का मार्ग दिखाती है।"

कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर भजन-कीर्तन में लीन रहे। वातावरण पूर्ण रूप से भक्तिमय हो गया। पं. पवन चतुर्वेदी के ओजस्वी वचनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि "भागवत कथा के पहले और बाद में भी मन को स्थिर रखें, और भौतिकता की बजाय आध्यात्मिकता से जुड़ने का प्रयास करें।

इस पावन आयोजन ने समस्त श्रद्धालुओं को जीवन के वास्तविक उद्देश्य की ओर उन्मुख किया और उन्हें सत्संग के महत्व से परिचित कराया।

Uditbharatnews News

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