छत्तीसगढ़ होगा कृषि में अग्रिम और उन्नत राज्य, विकसित कृषि अभियान –ICAR करेगा किसानों को जागरूक, प्रशिक्षित
- छत्तीसगढ़ –में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी विकास के लिए देश का तीसरा और छत्तीसगढ़ में एक मात्र शोध संस्था राष्ट्रिय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन ICAR देश भर में विकसित कृषि संकल्प अभियान में सक्रिय रूप से सहभागिता निभाते हुए। राज्य में कृषि क्षेत्र की समस्या और और उसके लिए समाधान को संकल्पित है और राज्य को उन्नत कृषि योग्य देश में अग्रिम बनाने के लिए निरंतर कृषकों में जागृति और मिट्टी की विषमता और उसकी क्षमता पर शोध कर रहा है। वहीं मिट्टी की गुणवत्ता विकास के लिए रासायनिक खाद्यों के उपयोग और मात्रा के प्रति किसानों को जागरुक कर रहा है। किसानों के बीच जाकर प्रायः सभी जिलों में,,,
बीज उपचार मृदा परीक्षण, जैव उर्वरक कीट नाशक जैव नियंत्रण –उन्नत फसल किस्मों को अपनाने, धान में कीट प्रबंधन, स्वस्थ मृदा प्रबंधन, सहित मौसमी फसल में परंपरागत खेती के अलावा भिन्न कृषि और बीजों के प्रति जागरूकता से किसानों को अवगत करवाया जा रहा है वहीं स्थानीय स्तर पर, जलवायु का शोध सहित किसानों को, कृषि भिन्नता और विकास की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रेस वार्ता के जरिए संस्थान के निदेशक –पी. के. राय ने बताया कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव है कि ICAR इकलौता संस्थान है कृषि शोध के लिए जो छत्तीसगढ़ की संरचना, जलवायु और मिट्टी के दोषों का निवारण कर, राज्य को आधुनिक कृषि में अग्रिम लाने का प्रयाय कर रहा है, और पारंपरिक खेती के अलावा अन्य फसल के लिए किसानों को जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने संस्था के वैज्ञानिकों द्वारा छत्तीसगढ़ के जिलों में जाकर कृषि अध्ययन, मृदा परीक्षण, किसानों को होने वाली परेशानी, जलवायु अनुकूल कृषि की जानकारी, समस्याओं का समाधान सम्बन्धी, शोध की जानकारी देते हुए वैज्ञानिकों से सीधे मिलवाया और मीडिया को वैज्ञानिकों द्वारा किए कार्यों की जानकारी प्रदान की गई। जिसमें श्री संदीप जी द्वारा धमतरी जिले में मृदा परीक्षण–डॉ. विनय सब्जी विज्ञान स्पेशलिस्ट, आशीष मराठे–जैव रसायन वैज्ञानिक, डॉ. विनोद कुमार वासनिक, अर्कप्रभ राय मृदा वैज्ञानिक–सुशील शर्मा सूक्ष्म जीव विज्ञान प्रधान वैज्ञानिक ने अपने अपने क्षेत्र में किए गए शोध की जानकारी साझा की, और आने वाली समस्याओं के निवारण को भविष्य में समाप्त करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं और इसका निदान शीघ्र संभव है और जारी कार्य की बात कही।

प्रधान संपादक
पूरन सिंह
