मुंगेली में मिट्टी के रावण का लाठियों से पीट-पीट कर किया जाता है वध

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मुंगेली ।

छत्तीसगढ़ के मुंगेली नगर में मिट्टी के रावण की लाठियों से पीट-पीट कर वध करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। इस कड़ी में गोवर्धन परिवार द्वारा मिट्टी के रावण का निर्माण किया जा रहा है। दशमी को सबसे पहले गोवर्धन परिवार के लोग रावण की पूजा करते हैं। इसके बाद यादव समाज द्वारा मिट्टी से निर्मित रावण का लाठी से पीट पीट कर वध किया जाता है।
वर्षो पुरानी परंपरा के आयोजन को लेकर तैयारी की जा रही है। वीर शहीद धनंजय सिंह स्टेडियम बीआर साव स्कूल में प्रत्येक वर्ष की तरह पूरी तैयारी की जा रही है। इस संबंध में गोवर्धन परिवार के सदस्य श्रीकांत गोवर्धन ने बताया कि सबसे पहले इसकी शुरुआत 1896 में की गई। इसमें आज भी राजा कुंभकार परिवार द्वारा शुरू से ही इको फ्रैंडली रावण का निर्माण किया जाता है और साथ ही यह परंपरा हैं कि सर्वप्रथम मिट्टी से बने रावण की गोवर्धन परिवार द्वारा पूजा की जाती है।

जिला मुख्यालय से महज दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत कन्तेली में सोलहवीं सदी से चली आ रही है एक अनोखी परंपरा है। यहां राजा की सवारी निकलती है लेकिन रावण का दहन नहीं होता है। राजा के दर्शन के लिए 44 गांवों से ग्रामीण एकत्रित होते हैं।

राजा कुलदेवी मां महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली की पूजा कर पूरे क्षेत्र में खुशहाली की कामना करते हैं। छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा गांव है जिस प्रकार केरल में मान्यता है कि दशहरे के दिन राजा बली अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए पाताल लोक से बाहर आते हैं और प्रजा उन्हें सोनपत्ती देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करती है।
कुछ ऐसी ही परंपरा जिले के कन्तेली गांव में है, जो दशकों से चली आ रही है। 16वीं सदी से चली आ रही यह परंपरा दशहरे के दिन होती है। यहां के राजा यशवंत सिंह के महल से एक राजा की सवारी निकलती है, इसमें लोग शामिल होकर नाचते-गाते कुलदेवी की मंदिर तक पहुंचते हैं।

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