प्रदेश में गहराया जल संकट, पांच प्रमुख बांध पूरे सूखे

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रायपुर। 

प्रदेश में इस वर्ष भीषण जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। गर्मी के मौसम में जलस्रोत सूखने की कगार पर हैं और राज्य के पांच प्रमुख बांध  मुरूमसिल्ली, मोगरा बैराज, पेंड्रावन, मयाना और घुमरिया पूरी तरह से शून्य जल स्तर पर पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही आठ अन्य बांधों में जल स्तर 10 प्रतिशत से भी नीचे दर्ज किया गया है। लगातार तीसरे वर्ष जल स्तर में गिरावट ने विशेषज्ञों और सरकार दोनों को चिंता में डाल दिया है।

आंकड़ों से स्पष्ट है कि जल संरक्षण की दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। गांवों में खेत सूख रहे हैं, तो शहरों में भी पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। राजधानी रायपुर सहित कई शहरों में जल कटौती का सामना करना पड़ रहा है। टैंकरों से जल आपूर्ति बढ़ा दी गई है, लेकिन वह भी अपर्याप्त साबित हो रही है।

मानसून की अनियमितता और सूखा, जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण में लापरवाही, वर्षा जल संचयन का अभाव, पानी के अपव्यय और अनुशासनहीन उपयोग जलसंकट के प्रमुख कारण हैं। जल विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ को इस संकट से उबारने के लिए वर्षा जल संग्रहण, जलाशयों का पुनर्निर्माण, तालाबों की खुदाई और जल साक्षरता अभियान पर तत्काल ध्यान देना होगा। राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग के सामने अब बड़ी चुनौती है, जल प्रबंधन की दीर्घकालिक नीति बनाना और उसे जमीनी स्तर पर लागू करना। यदि अभी निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पीने का पानी भी दुर्लभ हो सकता है। राज्य जल संसाधन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों से साफ  है कि बांधों में जल संचयन की स्थिति भयावह है।

बांध का नाम  2025   2024  2023
मुरूमसिल्ली  0.01प्रतिशत   0.00 प्रतिशत  31.5 प्रतिशत
मोगरा  0.00 प्रतिशत   20 प्रतिशत  14 प्रतिशत
पेंड्रावन  0.00 प्रतिशत   5.3 प्रतिशत  16.8 प्रतिशत
मयाना  0.00 प्रतिशत   2.8 प्रतिशत  20.3 प्रतिशत
घुमरिया  0.00 प्रतिशत   1.1 प्रतिशत  14.3 प्रतिशत

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